स्पोर्ट्स का हिंदी अर्थ

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time:2021-10-18 02:39:55 ओला-ऊबर नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया, सरकार ने जारी कीं नई गाइलाइंस Views:4591

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ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियां सबसे पीक आवर्स के दौरान किराये में कई गुना बढ़ोतरी कर देती हैं. अब सरकार ने इन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है.
ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियां सबसे अहम समय यानी पीक आवर्स के दौरान किराये में कई गुना बढ़ोतरी कर देती हैं. लेकिन अब सरकार ने इन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है.

सरकार ने शुक्रवार को ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के ऊपर मांग बढ़ने पर किराए बढ़ाने की एक सीमा लगा दी है. अब ये कंपनियां मूल किराए के डेढ़ गुने से अधिक किराया नहीं वसूल सकेंगी.

दरअसल सरकार का यह कदम अहम इसलिए भी हो जाता है, क्योंकि लोग कैब सेवाएं देने वाली कंपनियों के अधिकतम किराए पर लगाम लगाने की लंबे समय से मांग कर रहे थे. यह पहली बार है जब भारत में ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स को रेग्यूलेट करने के लिए सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं.

कार पूल करने वाले कमर्शियल प्लेटफॉर्म्स को भी नियमों का पालन करना होगा और इस लाइसेंस हालिस करना होगा. हालांकि, नए नियम तभी लागू होंगे, जब राज्य सरकारें उनसे जुड़ी अधिसूचना जारी करेंगे.

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कैब कंपनियों को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए, जिस दिन डेटा जेनरेट किया गया था.

डेटा को भारत सरकार के कानून के अनुसार सुलभ बनाना होगा लेकिन ग्राहकों के डेटा को यूजर्स की सहमति के बिना शेयर नहीं किया जाएगा. कैब एग्रीगेटर्स को एक 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा और सभी ड्राइवरों को अनिवार्य रूप से हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा होना होग.

नए नियमों के मुताबिक, कैब कंपनी को बेस फेयर से 50 फीसदी कम चार्ज करने की अनुमति होगी. केंद्र सरकार ने एग्रीगेटर को रेगुलेट करने के लिए गाइडलाइन्स जारी किया है जिसका राज्य सरकारों को भी पालन करना अनिवार्य होगा.

वहीं, कैंसिलेशन फीस कुल किराए का दस प्रतिशत होगा, जो राइडर और ड्राइवर दोनों के लिए 100 रुपए से अधिक नहीं हो सकता. ड्राइवर को अब ड्राइव करने पर 80 फीसदी किराया मिलेगा, जबकि कंपनी को 20 प्रतिशत किराया ही मिल सकेगा.

मंत्रालय ने बयान में कहा है कि इससे पहले एग्रीगेटर का रेगुलेशन उपलब्ध नहीं था। अब इस नियम को ग्राहकों की सुरक्षा और ड्राइवर के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जिसे सभी राज्यों में लागू किया जाएगा. बता दें कि मोटर व्हीकल 1988 को मोटर व्हीकल एक्ट, 2019 से संशोधित किया गया है.



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